सबद-2
ओ३म् मोरे छाया न माया लोही न माँसूँ ।
रक्तूँ न धातूँ, मोरे माई न बापूँ ।
आपण आपू, रोही न रापूँ,
कोपूँ न कलापूँ, दुःख न सरापूँ ।।
लोई अलोई । त्यँह तृलोई।
ऐसा न कोई जपां भी सोई।।
जिहिं जपे आवागवण न होई ।।
मोरी आद न जाणत। महीयल धूँवा बखाणत ।।
उरध ढाकले तृसूलूँ ।
आद अनाद तो हम रचीलो, हमे सिरजीलो सै कोण ।।
म्हे जोगी कै भोगी कै अल्प अहारी
ज्ञानी कै ध्यानी, कै निज कर्म धारी ।।
सोखी कै पोखी। कै जल बिंब धारी,
दया धर्म थापले निज बाला ब्रह्मचारी ।।२।।
रक्तूँ न धातूँ, मोरे माई न बापूँ ।
आपण आपू, रोही न रापूँ,
कोपूँ न कलापूँ, दुःख न सरापूँ ।।
लोई अलोई । त्यँह तृलोई।
ऐसा न कोई जपां भी सोई।।
जिहिं जपे आवागवण न होई ।।
मोरी आद न जाणत। महीयल धूँवा बखाणत ।।
उरध ढाकले तृसूलूँ ।
आद अनाद तो हम रचीलो, हमे सिरजीलो सै कोण ।।
म्हे जोगी कै भोगी कै अल्प अहारी
ज्ञानी कै ध्यानी, कै निज कर्म धारी ।।
सोखी कै पोखी। कै जल बिंब धारी,
दया धर्म थापले निज बाला ब्रह्मचारी ।।२।।