सबद-8


सबद-8

           ओ३म् सुण रे काजी सुण रे मुल्लां । सुण रे बकर कसाई ।। किणरी थरपी छाली रोसो । किणरी गाडर गाई ।। सूल चुभीजै करक दुहेली । तो है है जायो जीव न घाई ।। थे तुरकी छुरकी भिस्ती दावो । खायबा खाज अखाजूँ ।। चर फिर आवै सहज दुहावै। तिसका खीर हलाली । जिसके गले करद क्यूं सारो। थे पढ सुण रहिया रहिया खाली  ।।८।।