सबद-43


सबद-43

ओ३म् ज्यूं राजगए राजिन्दर झूरै । खोज गए नै खोजी ।। लाछ मुई गिरहायत झूरै । अरथ बिहूंणा लोगी । मोर झड़े कृसाण भी झूरें। बिंद गए नै जोगी ।। जोगी जंगम जपिया तपिया। जतीं तपी तक पीरूं । जिहिं तुल भूला पाहण तोलै । तिहि तुल तोलन हीरूं ।। जोगी सो तो जुग जुग जोगी । अब भी जोगी सोई ।। थे कान चिरावो चिरघट पहरो । आयसां यह पाखंड तो जोग न कोई ।। जटा बधारो जीव सिंघारो । आयसां इहि पाखंड तो जोग न होई ।।४३।।