सबद-35


सबद-35

ओ३म् बल बल भणत व्यासूं । नाना अगम न आसूं।। नाना उदक उदासूं । बल बल भई निरासूं । गल मैं पड़ी परासूं । जां जां गुरु न चीन्हों । तइया सींच्या न मूलूं । कोई कोई बोलत थूलूं ।।३५।।।