सबद-22


सबद-22

ओ३म् लो लो रे राजिंदर रायों । बाजै बाव सुवायों ।। आभै अमी झुरायों । कालर करसण कीयों ।। नेपै कछू न कीयों । अइया उत्तम खेती ।। को को इमृत रायो । को को दाख दिखायों ।। को को ईख उपायों ।  को को नींब निबोलीं । को को ढाक ढकोली ।। को को तूषण तुंबण बेली । को को आक अकायों ।। को को कछु कमायों । ताका मूलू कुमूलू ।। डाल कुडालूं । ताका पात कुपातूं । ताका फल बींज कुबीजूं । तो नीरे दोष किसायों ।। क्यूं क्यूँ भएभागे ऊंणा । क्यूं क्यूं कर्म बिहूंणा ।। को को चिड़ी चमेड़ी । को को उल्लू आयों ।। ताकै ज्ञान न जोती । मोक्ष न मुक्ती ।।। याके कर्म इसायों । तो नीरे दोष किसायों ।।२२।।।