सबद-16
ओ३म् लोहै हूंता कंचन घड़ियों । घड़ियों ठाम सुठाऊं ।। जाटा हूँता पात करीलूं । यह कृष्ण चरित परिवाणों ।। बेंड़ी काठ संजोगे मिलिया । खेवट खेवा खेहूं ।। लोहा नीर किसी बिध तरिबा । उत्तम संग सनेहुं ।। विन किरिया रथ बैसैंला । ज्यू काठ संगीणी लोहा नीर तरीलूं ।। नांगड़ भागंड़ भूला महियल। जीव हतै मड़ खाईलो।।१६।।