सबद-12


सबद-12

        ओ३म् महमद-महमद न कर काजी । महमद का तो  विषम बिचारूं ।। महमद हाथ करद जो होती । लोहै घड़ी न सारूं ।। महमद साथ पयंबर सीधा । एक लख असी  हजारूं । महमद मरद हलाली होता ।  तुम ही भए मुरदारूं ।।१२।।